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| কলেজে যাওয়ার সময় ||कॉलेज जाने का समय ||Time to go to college |
কলেজে যাওয়ার সময়
-স্বর্না প্রতিদিন কলেজে যাওয়ার সময় একটি ছেলেকে রাস্তার পাশে দাড়িয়ে থাকতে দেখে।
-ছেলেটি স্বর্নাকে দেখেই বাড়ি চলে যেতো।
-কলেজ ছুটি হলে আবার আসার সময়ও দেখতো।
কিন্তু ছেলেটি সাহস করে কিছুই বলত না।
-স্বর্না ব্যাপার টি বুঝতে পারে।
-ছেলেটি স্বর্নাকে দেখেই বাড়ি চলে যেতো।
-কলেজ ছুটি হলে আবার আসার সময়ও দেখতো।
কিন্তু ছেলেটি সাহস করে কিছুই বলত না।
-স্বর্না ব্যাপার টি বুঝতে পারে।
-বাড়িতে এসে স্বর্না ভাবে ছেলেটিকে কালকে কিছু বলবে।
-আজকেও স্বর্না কলেজ যাবার সময় দেখে ছেলেটিকে ডাক দেই।
-ছেলেটি এসে বলে বলুন কি বলবেন।
-আপনি প্রতিদিন এখানে দাড়িয়ে থাকেন কেনো।
-এমনিতেই দাড়িয়ে থাকি।
-নাকি আপনি আমাই ভালোবাসেন।
-কিযে বলেন, আমি এমনিতেই দাড়িয়ে থাকি।
-কাল থেকে আর দাড়িয়ে থাকবেন না।
-ওকে আর দাড়িয়ে থাকব না।
-এটা বলেই স্বর্না কলেজে চলে গেলো।
..
– পরের দিন স্বর্না কলেজে যাওয়ার সময় দেখে ছেলেটি আবার ওখানেই আছে। তবে এবার বসে আছে।
-স্বর্নার ওনেক রাগ হয় তখন। মনে হয় ছেলেটিকে খুন করে ফেলবে। কিন্তু সেটা পারবে না ।
-প্রচন্ড রেগে যায় স্বর্না। সে কারনে সে আজকে আর কলেজে যায় নি। সোজা বাড়িতে চলে আসে।
..
-আজকে সারাদিন শুধু ছেলেটির কথাই মনে পড়ছে স্বর্নার।
-যতই ভাবছে যে ছেলেটির কথা ভাববে না ততই মনে পড়ছে। তাহলে কি সে ছেলেটিকে ভালোবেসে ফেলছে। না এসব কি ভাবছি। এভাবে সে সেদিনটা পার করল।
..
-পরের দিন আবার কলেজে যাবার সময় দেখে ছেলেটি আজও বসে আছে।
-স্বর্না আজকেও আবার ডাকে।
-জ্বী আমাকে ডাকছেন।
-হ্যা আপনাকেই ডাকছি।
-আমার নাম রাফি।
আজকে থেকে এই নামেই ডাকবেন।
-আরে আপনার নাম জানতে কি এখানে ডেকেছি।
-ও কেনো ডেকেছেন সেটা বলুন।
-এক চড় মেরে দেই স্বর্না।
এরপর বলা শুরু করে।
তুমি এখানে প্রতিদিন দাড়িয়ে থাকো কেনো। পরে যখন বলছি আর দাড়িয়ে থাকবে না। এর পর থেকে বসে থাকো।
কি মনে করো নিজেকে অনেক চালাক। আমি কি বুঝি না ভাবছো। একবারে বলে ফেলে কথা গুলো।
-রাফি হাবার মতন দাড়িয়ে থাকে স্বর্নাকে সে কিছুই বলতে পারে না ।
-স্বর্না রাফির কাছে কিছুই শুনতে না পেয়ে রাগে চলে যেতে থাকে।
-স্বর্না একটু দাড়াবে কিছু কথা ছিলো।
-কিন্তু স্বর্না থামে না।
-রাফি দোড়ে স্বর্নার কাছে যায়। স্বর্না একটু থামবে কিছু কথা ছিলো।
-ওকে বলো কি বলবে ।
-স্বর্না আমি তোমাকে সেই প্রথম দিন থেকে ভালোবাসি। তোমাকে দেখার পরে আমি নিজকে ধরে রাখতে পারি নি। তার পর থেকেই প্রতিদিন তোমাই দেখতেই ওখানে দাড়িয়ে থাকি।
-স্বর্নাও বলে আরে বুদ্ধ সেই অনেক দিন আগে থেকে আমি তোমাকে ভালোবাসি।
-সত্যি স্বর্না।
-হুম সত্যি রাফি ।
এভাবে সেদিন শুরু হয়েছিলো তাদের প্রেম কাহীনি ।
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-রাফি একটু বোকা টাইপের ছেলে ছিলো। রাফি কখনো মুখ ফুটে স্বর্নার কাছে কিছুই চাইতো না। স্বর্নার এই ব্যাপার টি অনেক ভালো লাগতো।
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-স্বর্না রাফিকে বলল চলো আজকে ফুচকা খাবো।
-হুম চলো। তবে আমি কিন্তু ঝাল খেতে কম পারি।
-আমি আছি না বুদ্ধ তোমার কিছুই হবে না।
-এটা বলেই তারা পাশাপাশি হাটতে লাগলো গন্তব্য ফুচকার দোকান।
..
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-দোকানে গিয়ে স্বর্না ২ টা ফুচকার অর্ডার দিলো। দোকানিকে বলে দিয়েছে যেনো বেশি করে ঝাল দিতে।
-দোকানি দুটো ফুচকার প্লেট তাদের সামনে দিয়ে চলে গেলো।
-স্বর্না বলল নাও রাফি খাও।
-কোনটাতে ঝাল কম স্বর্না।
-এইযে এটাতে ঝাল কম।
-রাফি ওই প্লেট নিয়ে খাওয়া শুরু করল। কিছুক্ষন পর রাফির চোখমুখ একেবারে লাল হয়ে গেলো।
স্বর্না পানি দাও পানি। এতো অনেক ঝাল।
-স্বর্না দ্রুত পানি এগিয়ে দিলো, রাফি পানি খেয়েও বার বার বলছে স্বর্না,আমার চোখ মুখ দুটোই জ্বলছে।
-এই প্লেটে এতো ঝাল কি করে হলো।
-রাফির চোখ দিয়ে পানি পড়বে পড়বে ভাব।
-স্বর্না আর নিজেকে ধরে রাখতে পারল না।
ওমনি রাফির ঠোটের সাথে নিজের ঠোট লাগালো।
-রাফি কিছুই বুঝে উঠতে পারল না। শুধু বুঝলো যে স্বর্নার ঠোটের স্পর্শ পাচেছ।
..
..
-রাফির অনেক লজ্জা করছিলো। তাই সে স্বর্নার কাছে থেকে নিজেকে ছাড়িয়ে নিলো।
-রাফি তুমি নিজেকে ছাড়িয়ে নিলো কেনো।
-আমার অনেক লজ্জা লাগছিলো তাই।
আর এগুলো বিয়ের পরে হবে আগে নই।
-তাহলে এখন ঝাল কম লাগছে তো।
-হুম অনেকটা কম লাগছে।
-তাহলে চলো উঠি এবার।
-হুম চলো।
-দুজনেই পাশাপাশি হেটে চলে যায়।
..
..
-স্বর্না বাড়িতে এসে ভাবতে থাকতে , আসলে সে ভাগ্যবতী। রাফিকে পেয়ে সে অনেক খুশি।
কেননা রাফি আজ পর্যন্ত স্বর্নার হাত টা ছুয়ে দেখে নি।
গতকালের ঘঠনাই লজ্জিত হওয়ার কথা ছিলো স্বর্নার। সেখানে উলটে রাফিই লজ্জিত হলো।এগুলো ভাবছে আর মুচকি মুচকি হাঁসছে স্বর্না ।
..
..
-এরি মাঝে রাফির কল।
-হ্যাঁ রাফি বলো ।
-কালকে দেখা করতে পারবে জরুরি ভাবে ।
-কিন্তু গতকালকেই তো দেখা করলাম।
-জরুরি কথা আছে তাই।
-ফোনে বলো।
-না দেখা করতে হবে, ফোনে বলা যাবে না।
-ওকে আসবো।
এখন রাখি।
স্বর্না ভাবে কি এতো জরুরি কথা যেটা ফোনে বলতে পারল না। এসব ভাবতে ভাবতে ঘুমিয়ে পড়ে স্বর্না ।
..
..
-পরের দিন তাদের সেই চিরচেনা যায়গাই যাচেছ স্বর্না। গিয়ে দেখে রাফি আগেই চলে এসেছে।
স্বর্না দেখে রাফিকে অনেক বিষন্ন দেখাচেছ।
-কি হয়েছে রাফি ।
-তেমন কিছু না স্বর্না ।
-তাহলে তোমাই এতো বিষন্ন দেখাচেছ কেনো।
-আসলে স্বর্না একটা কথা বলবো তোমাই রাগ করবে নাতো।
-রাগ করবো কেনো তুমি তো আমার প্রান। যেটা বলবে যদিও কষ্টের হয় তবুও সয়ে নেবো।
-না মা——নে।
-কি মানে মানে করছো। বলো তারাতারি।
..
..
-তোমার হাত টি একটু ধরতে দিবা।
-স্বর্না তো অবাক হয়ে গেছে। হাত ধরতে এতোকিছু করতে হবে। (মনে মনে বলে)
-হাত ধরবে এতে কিছু করতে হবে রাফি।
-না মানে যদি রাগ করো তাই।
-আচছা তুমি আমাই এতো ভালোবাসো কেনো।
-জানি না স্বর্না।
-যদি কোনদিন হারিয়ে যায় আমি।
-রাফি কেদে দিয়ে বলে ওমন কথা বলো না স্বর্না আমি তোমাকে হারাতে দিবো না, আর হারাতেই চাই না ।
-আর কাদা লাগবে না এবার কান্না থামাও। এইযে হাত নাও এবার ধরো।
-রাফি আজকে প্রথম স্বর্নার হাতটি ধরলো।
-মনে হচেছ রাফি বিশাল বড়ো কিছু জয় করে ফেলেছে ।
..
..
-স্বর্না ভাব যে আসলেই তার মতন সুখি মনে হয় কেউ নাই। স্বর্না যেমন ছেলে চেয়েছে তেমন ভাবেই রাফিকে পেয়েছে।
স্বর্না নিজের মতন করে রাফিকে তৈরি করবে। কারন রাফির মাঝেই সে যে সারাটা জীবন পার করবে।
कॉलेज जाने का समय
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| কলেজে যাওয়ার সময় ||कॉलेज जाने का समय ||Time to go to college |
-स्वर्ण रोज कॉलेज जाते समय एक लड़के को सड़क पर खड़ा देखता है।
-वह स्वर्ण स्वर्णा को देखकर घर जा सकता था।
-जब आप कॉलेज की छुट्टी के लिए वापस आते हैं, तो आप देखते हैं।
लेकिन लड़के ने साहसपूर्वक कुछ नहीं कहा।
-सोने की बात को सोना समझ सकता है।
..
-घर आकर लड़के को सपने में कुछ बताया।
- आज, जब मैं स्वर्ण को कॉलेज जाते हुए देखता हूं, तो मैं अपने बेटे को फोन करता हूं।
- नीचे आने पर मुझे क्या कहना है।
-आप यहां रोज खड़े होते हैं।
-मैं खुद से खड़ा हूं।
-नहीं तुम मुझे प्यार करते हो
-किय ने कहा, मैं इसके द्वारा खड़ा हूं।
- थोड़ी देर के लिए भी खड़े न रहें।
-मैं उसे अब खड़ा नहीं करूंगा।
- इसीलिए स्वर्णा कॉलेज गई।
..
- अगले दिन जब वह स्वर्ण को कॉलेज जाते हुए देखता है, तो लड़का वापस वहीं आ जाता है। लेकिन इस बार यह बैठा है।
-फिर सोने का ओनक नाराज है। ऐसा लग रहा है कि वह लड़के को मार डालेगी। लेकिन ऐसा नहीं होगा।
-फिर गुस्सा आ जाता है स्वर्णा को। जिसकी वजह से वह आज कॉलेज नहीं गई। सीधे घर आता है।
..
- आज, मुझे पूरे दिन लड़के की बातें याद हैं।
-हर कोई सोचता है कि वह नहीं सोच रहा है कि लड़का सोच रहा है। तो क्या वह लड़के से प्यार कर रही है? नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। इस प्रकार वह उस दिन गुजर गया।
..
- अगले दिन, जब लड़का कॉलेज जा रहा है, तो लड़का आज भी बैठा है।
-स्वर्ण ने आज फिर फोन किया।
- वही तो बुला रहा हूं।
-वह आपको बुला रहा है।
- मेरा नाम रफी है।
इसे आज से इस नाम से पुकारें।
-जब मैंने आपका नाम जानने के लिए यहां फोन किया।
- मुझे बताओ क्यों।
-यह एक तस्वीर है।
फिर वो कहने लगी।
आप रोज यहां क्यों खड़े होते हैं? बाद में जब मैं खड़ा नहीं रहा। तब से बैठ गए।
क्या आपको लगता है कि आप बहुत चालाक हैं? मुझे आश्चर्य है कि आपका क्या मतलब है। एक बार तो कहो।
-रफी ह्यूबर की तरह खड़ा है इसलिए वह स्वर्ण से कुछ नहीं कह सकता।
-रविना रफी की कोई बात सुने बिना गुस्से में चली जाती है।
- सोने को लेकर कुछ बात हुई थी।
-लेकिन सोना बंद नहीं होता।
-रफी स्वर्ण की ओर दौड़ता है। थोड़ी रुकने की बात हुई।
उसे क्या कहना है बताओ।
-स्वर्णा मैं उस दिन से तुमसे प्यार करती हूं। आपको देखने के बाद, मैं खुद को पकड़ नहीं पाया। तब से हर दिन, मैं हर दिन तुम्हें देखता रहा।
-सरना कहती है, अरे बुद्ध मैंने तुमसे बहुत पहले से प्रेम किया है।
- सच्चा सोना।
-मैं वास्तव में रफी हूं।
इस प्रकार उनके दिन की शुरुआत बिना किसी प्यार के हुई।
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-रफी थोड़ा गूंगा टाइप का लड़का था। रफी कभी भी अपने चेहरे में कुछ नहीं चाहते थे। स्वर्ण को यह बात बहुत पसंद आई।
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-स्वर्ण ने रफी से कहा कि आज खाना खा लो।
- चलो। हालांकि, मैं कम मिलाप खा सकता हूं।
-मैं बुद्ध नहीं हूं, तुम्हारा कुछ नहीं होगा।
-इसलिए उन्होंने डेस्टिनेशन फ्यूचर्स स्टोर में घूमना शुरू किया।
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सामान्य चैट चैट लाउंज
-मैं दुकान पर गया और रात 2 बजे सोने का ऑर्डर दिया। दुकानदार से कहा गया है कि वह ज्यादा से ज्यादा सोल्डर दे।
- दो कटे हुए प्लेट उनके सामने गए।
-सरना ने कहा न तो रफी खाओ।
-कांटा में कम सोना।
-इसमें कम मिलाप।
-रफी ने उस प्लेट से खाना शुरू किया। थोड़ी देर बाद रफी की आँखें लाल हो गईं।
सोने का पानी दो। यह बहुत मिलाप है।
-स्वरा ने तेजी से पानी आगे बढ़ाया, रफी बार-बार कहता है, पानी पीने के बाद भी मेरी और दोनों की आंखें जल रही हैं।
-इस थाली का क्या हुआ?
-रफी की आंखों से पढ़ेगा पानी सोच
-अभी सोना खुद पर पकड़ नहीं बना सका।
ओमनी ने रफी के होठों से अपने आप मारा।
रफी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। बस एहसास हुआ कि सोने के होंठ छू रहे हैं।
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रफी बहुत शर्मीले थे। इसलिए उसने खुद को सोने से दूर कर लिया।
-रफी आप खुद क्यों आगे निकल गए।
-मुझे बहुत शर्म महसूस हुई।
और वे शादी के बाद नहीं होंगे।
- तो अब मिलाप कम दिखता है।
-मैं बहुत कम महसूस कर रहा हूं।
-फिर चलो उठो।
- चलो।
-हम दोनों साथ चलते हैं।
..
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-सरना घर आती है और सोचती है, वास्तव में, वह किस्मत में है। रफी को पाकर वह बहुत खुश है।
क्योंकि रफी ने आज तक स्वर्ण के हाथ नहीं देखे हैं।
स्वर्ण को कल की घटना के लिए शर्मिंदा होना चाहिए था। इसके विपरीत, रफ़ी को शर्म आती थी। वे सोच रहे थे और वे हँस रहे थे और हँस रहे थे।
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रफी की पुकार।
- हां, रफी।
-मैं आपसे एक जरूरी तरीके से मिलूंगा।
-लेकिन मैं आपसे कल मिला था।
-क्या बात करनी है।
- मुझे फोन पर बताओ।
-नहीं मिलने की जरूरत है, फोन पर बुलाया जा सकता है।
चलो।
अब रख लो
एक सपने में इतना महत्वपूर्ण क्या है कि फोन नहीं बोल सकता था। स्वर्ण इन बातों को सोचकर सो गया।
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-अगले दिन, वे उस चिरस्थायी सपने में गए हैं। रफी इसे देखकर पहले ही निकल चुके हैं।
उसके सपने को देखकर रफी को बहुत दुःख हुआ।
- रफी को क्या हुआ।
- इतना सोना नहीं।
- तो तुम इतने उदास क्यों लग रहे थे।
-मैं कहूंगा कि स्वर्ण में एक बात आपको गुस्सा नहीं करेगी।
- मैं गुस्से में हूँ क्योंकि तुम मेरी आत्मा हो। जो कहना है, भले ही मुश्किल हो, मैं बचूंगा।
-नहीं माँ- - ने।
-क्या मतलब? मुझे जल्दी बताओ।
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-मुझे अपना हाथ थोड़ा पकड़ना है।
-स्वर्ण स्तब्ध है। हाथ पकड़ने के लिए बहुत कुछ करना है। (मन में कहो)
रफी को इसके बारे में कुछ करना होगा।
-मुझे मतलब नहीं है कि तुम नाराज हो।
- वैसे तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो।
पता नहीं।
- अगर मैं कभी खो जाता हूं।
रफी कैद, ऐसी बात मत करो, स्वर्ण मैं तुम्हें निराश नहीं करूंगा, और न ही मैं हारना चाहता हूं।
- अधिक कीचड़ नहीं, रोना बंद करो। अब अपना हाथ ले लो।
-रफी ने आज पहला सोने का हाथ पकड़ा।
- मुझे लगता है कि रफी ने कुछ बड़ी चीजें जीती हैं।
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-स्वरा सोच रही थी कि कोई भी वास्तव में उसके जैसा खुश नहीं है। रफ़ी को सरना जैसा बेटा मिला।
स्वर्ण रफी को अपने जैसा बनाएगा। क्योंकि रफी के बीच में वह अपनी पूरी जिंदगी गुजारेंगे।
Time to go to college
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